गर्मी के मौसम में पशुओं की देखभाल अन्य मौसम से भिन्न है। इस मौसम में पशुओं के शरीर के तापमान को नियंत्रित रखने के लिए पशुपालक द्वारा पशुओं के शरीर को ठंडक प्रदान करने वाले उपाय करने की आवश् यकता है । गर्मी के मौसम में पशुओं (जैसे गाय, भैंस, बकरियों, भेड़ों) की विशेष देखभाल बहुत आवश्यक है क्योंकि अधिक तापमान से उनका स्वास्थ्य, पाचन और दूध उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हो सकता है। गर्मी के मौसम में पशुओं के प्रबंधन को मुख्य रूप से 4 आयामों में बांटा गया है।
आवास प्रबंधन
गर्मी के मौसम में पशुओं के आवास प्रबंधन का मुख्य उद्देश्य उन्हें लू (हीट स्ट्रोक) और तपिश से बचाना है। अगर पशु के रहने का स्थान ठंडा रहेगा, तो वह बीमार कम पड़ेगा और दूध का उत्पादन भी सही मात्रा में होगा। आवास को ठंडा रखने के लिए पशुपालक को ये तरीके अपनाने चाहिए:
शेड (छत) का प्रबंधन
- अगर छत टीन या सीमेंट की चादर की है, तो उस पर 4-6 इंच मोटी घास, फूस या पुआल की परत बिछाएं ।
- छत पर सफेद चूना लगाने से भी गर्मी का असर कम हो जाता है क्योंकि यह धूप को परावर्तित कर देता है।
- हवा का संचार
- पशुशाला हवादार होनी चाहिए, इसके लिए खिड़कियों और दरवाजों पर खस या जूट के बोरे लटकाएं और उन पर पानी छिड़कते रहें। इससे पशुशाला के अंदर की हवा ठंडी बनी रहेगी ।
- पशुशाला के अंदर पंखे, एग्जॉस्ट फैन या कूलर का इस्तेमाल करें ।
- दूरी और ऊंचाई: पशुशाला शेड की ऊंचाई कम से कम 10-12 फीट होनी चाहिए ताकि हवा का दबाव कम रहे और पशुशाला अंदर से ठंडी रहे ।
- छायादार पेड़: बाड़े के आसपास छायादार पेड़ (जैसे नीम, पीपल, बरगद) लगाएं । ये प्राकृतिक रूप से तापमान को 4-5 डिग्री कम रखते हैं ।
- फर्श की सफाई: गोबर और पेशाब की नियमित सफाई करें । गीला फर्श और गंदगी गर्मी के साथ मिलकर ऊष्मा पैदा करती है, जिससे पशु को सांस लेने में दिक्कत हो सकती है ।
- धूप से बचाव: दोपहर 11 से 4 बजे के बीच पशुओं को खुले में न बांधें । उन्हें पशुशाला शेड के सबसे ठंडे हिस्से में रखें ।
आहार प्रबंधन
गर्मी के मौसम में पशुओं के आहार प्रबंधन के लिए यहां कुछ मुख्य सुझाव दिए गए हैं, जिसके उपयोग से पशुपालक अपने पशुओं के शरीर एवं उत्पादन का ख्याल रख सकता है :
- खिलाने का समय बदलें: पशुओं को दोपहर की गर्मी में चारा न दें । उन्हें सुबह जल्दी (6 बजे से पहले) और रात को देर से (8 बजे के बाद) भोजन देना सबसे अच्छा है। ठंडे समय में खिलाने से पशु अधिक मात्रा में और चाव से खाते हैं ।
- आहार में बदलाव और खाद्य पदार्थ: गर्मी के मौसम में पशुओं के शरीर का तापमान सामान्य रखने और उन्हें ठंडक पहुंचाने के लिए उनके आहार में निम्नलिखित बदलाव और खाद्य पदार्थ शामिल करने चाहिए:
- हरे चारे की अधिकता: गर्मी में सूखे चारे की तुलना में हरा चारा (जैसे बरसीम, ज्वार, नेपियर, गिनी घास, जई, मक्का या बाजरा) अधिक दें। इसमें 70-90% तक पानी होता है जो शरीर में नमी बनाए रखता है।
- बकरियों को रसीला और हरा चारा अधिक दें जैसे बरसीम, जई, और शहतूत या गूलर की पत्तियां बहुत फायदेमंद होती हैं। इनमें पानी की मात्रा अच्छी होती है।
- दाने का स्वरूप: पशुओं को दिया जाने वाला दाना या खल रात भर पानी में भिगोकर दें। भीगा हुआ दाना ठंडा होता है और पचाना भी आसान होता है।
- आहार में खनिज: गर्मी के कारण पशुओं के शरीर से पसीने और पेशाब के जरिए जरूरी लवण निकल जाते हैं। इसलिए, उनके आहार में रोजाना 50-60 ग्राम खनिज मिश्रण जरूर मिलाएं ।
तरल पदार्थ और सप्लीमेंट्स
- साफ पानी: पशु के पास हर समय साफ और ठंडा पानी उपलब्ध होना चाहिए, ताकि पशु शारीरिक जरुरत के अनुसार पानी ग्रहण कर सके।
- नमक और गुड़ का घोल: पानी चारे में हल्का साधारण नमक और गुड़ मिलाकर पिलाने से पशु अधिक पानी पीता है और उसके शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बना रहता है, जिससे लू (हीट स्ट्रोक) का खतरा कम हो जाता है।
- चूने का पानी: पशुओं को रोजाना चूने का पानी पिलाने से उन्हें कैल्शियम मिलता है और ठंडक भी बनी रहती है।
- मीठा सोडा: चारे में थोड़ा मीठा सोडा मिलाने से पाचन ठीक रहता है और गर्मी का तनाव कम होता है।
ठंडी तासीर वाली चीजें
- तारामीरा: इसे फीड सप्लीमेंट के रूप में देने से पशु को गर्मी से राहत मिलती है और दूध की मात्रा भी बनी रहती है।
- दही और छाछ: विशेष रूप से कुत्तों या छोटे पालतू पशुओं के लिए आहार में दही या छाछ शामिल करना शरीर के तापमान को नियंत्रित करने में बहुत प्रभावी है।
- फलों का उपयोग: यदि संभव हो तो पानी की अधिक मात्रा वाले फल जैसे तरबूज और खरबूजा (बीज निकालकर) भी दिए जा सकते हैं, जो हाइड्रेशन के लिए अच्छे हैं।
विशेष टिप: यदि पशु बहुत ज्यादा गर्मी महसूस कर रहा हो, तो पानी में थोड़ी शक्कर या गुड़ का शरबत और मीठा सोडा मिलाकर देने से उसे तुरंत ऊर्जा मिलती है ।
सावधानी: बकरियों को दोपहर की तेज धूप (11 बजे से 4 बजे) में बाहर न चरने दें । उन्हें सुबह जल्दी और शाम को सूरज ढलने के बाद ही खाना दें । दोपहर 11 से 4 बजे के बीच पशुओं को सीधी धूप में बाहर न निकालें और न ही उनसे कोई भारी काम लें।
स्वास्थ्य प्रबंधन
गर्मी के मौसम में पशुओं का स्वास्थ्य प्रबंधन बहुत चुनौतीपूर्ण होता है । इस समय पशुओं को मुख्य रूप से लू (हीट स्ट्रोक), पेंटिंग (हांफना) और परजीवियों (जूं और चिचड़) से बचाना सबसे जरूरी है । पशुओं को स्वस्थ रखने के मुख्य उपाय:
- लू (हीट स्ट्रोक) के लक्षण पहचानें: अगर पशु जीभ बाहर निकाल कर हांफ रहा हो, सुस्त हो या उसे तेज बुखार हो, तो उसे तुरंत छायादार जगह पर ले जाएं और शरीर पर ठंडा पानी डालें।
- इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन: गर्मी में पशु के शरीर से लवण निकल जाते हैं । पानी में इलेक्ट्रोलाइट पाउडर या घर पर बना नमक-चीनी का घोल मिलाकर दें ।
- टीकाकरण: मानसून आने से पहले ही पशुओं को गलघोटू (HS) और खुरपका-मुँहपका (मुहाव/FMD) जैसी बीमारियों के टीके जरूर लगवाएं।
- परजीवी नियंत्रण (डीवॉर्मिंग): गर्मी में जूं और चिचड़ी बहुत बढ़ जाते हैं। इनसे बचाव के लिए पशु चिकित्सक की सलाह पर दवा का छिड़काव करें या शरीर पर लगाएं । गर्मी और उमस में भेड़ों के पैरों और शरीर पर कीड़े लगने का डर रहता है। समय-समय पर उनकी जांच करें और 'डिपिंग' करवाएं।
- दूध उत्पादन में गिरावट: गर्मी के तनाव (हीट स्ट्रोक) से दूध कम हो जाता है। इससे बचने के लिए पशु को सुबह-शाम ठंडे पानी से नहलाएं ।
- खनिज मिश्रण: स्वास्थ्य और प्रजनन क्षमता बनाए रखने के लिए रोजाना खनिज मिश्रण जरूर खिलाएं।
- भेड़ों को लू और हीट स्ट्रेस से बचाने के लिए ऊन की कटाई: गर्मी शुरू होने से ठीक पहले (मार्च-अप्रैल में) भेड़ों की ऊन काट देनी चाहिए। इससे उनके शरीर की गर्मी बाहर निकल पाती है और उन्हें ठंडक मिलती है।
जरूरी सलाह: यदि पशु को लू लग जाए, तो तुरंत डॉक्टर को बुलाएं ।
प्रजनन प्रबंधन
गर्मी के मौसम में पशुओं का प्रजनन प्रबंधन काफी चुनौतीपूर्ण होता है क्योंकि "हीट स्ट्रेस" के कारण पशु न तो सही समय पर गर्मी (हीट/ ताव) में आते हैं और न ही गर्भधारण कर पाते हैं। प्रजनन क्षमता बनाए रखने के लिए मुख्य बिंदु:
- मूक गर्मी (साइलेंट हीट) की पहचान: गर्मी में भैंसें अक्सर "साइलेंट हीट" में आती हैं, यानी वे रंभाती नहीं हैं । पशु को सुबह जल्दी और देर रात को ध्यान से देखें । अगर वह गर्भाशय ग्रीवा से पारदर्शक लसदार पदार्थ (डिस्चार्ज) दे रही है, तो वह गर्मी (ताव) में हो सकती है ।
- कृत्रिम गर्भाधान (ए.आई.) का सही समय: गर्मी के दिनों में ए.आई. हमेशा सुबह जल्दी या रात के ठंडे समय में करवाएं । दोपहर की गर्मी में गर्भ ठहरने की संभावना बहुत कम हो जाती है।
- गर्भाधान के बाद की देखभाल: कृत्रिम गर्भाधान (ए.आई.) करवाने के बाद पशु को 2-3 घंटे तक ठंडी और छायादार जगह पर रखें और उसके सिर और शरीर पर ठंडा पानी डालते रहें।
- विटामिन और खनिज: प्रजनन अंगों को स्वस्थ रखने के लिए विटामिन-ई और खनिज मिश्रण बहुत जरूरी है। इससे गर्भ ठहरने की संभावना बढ़ती है।
- उचित अंतराल: एक बार गर्भधारण न होने पर निराश न हों, लेकिन 21 दिन बाद दोबारा उसके लक्षणों पर कड़ी नजर रखें।
सारांश: गर्मी के मौसम में पशुओं को लू और भीषण गर्मी से बचाने के मुख्य उपाय हैं :
- पीने का पानी: पशुओं को दिन में कम से कम 3-4 बार साफ और ठंडा पानी पिलाएं। पानी के बर्तन छायादार जगह पर रखें ताकि वे गर्म न हों।
- आवास व्यवस्था: पशुशाला (शेड) हवादार होनी चाहिए। छत पर 4 से 6 इंच मोटी घास या पुआल की परत बिछाने से गर्मी कम लगती है । आप शेड में पंखे या कूलर का उपयोग भी कर सकते हैं।
- नहलाना: पशुओं के शरीर पर दिन में 2-3 बार ठंडा पानी छिड़कें या उन्हें तालाब/जोहड़ में ले जाएं, जिससे उनके शरीर का तापमान सामान्य रहे।